बर्ड फ्लू को एवियन फ्लू भी कहा जाता है। यह एक तरह का इन्फ्लुएंजा A वायरस है, जो ज़्यादातर पक्षियों और मुर्गियों में फैलता है, लेकिन कई बार इंसानों को भी चपेट में ले लेता है। H5N1 और H9N2 इसके खतरनाक स्ट्रेन माने जाते हैं। हाल ही में बिहार के दरभंगा जैसे इलाकों में हजारों पक्षियों की मौत के बाद लोगों में डर का माहौल है। ऐसे में सही जानकारी बेहद ज़रूरी है।
इंसानों में बर्ड फ्लू कैसे फैलता है?
बर्ड फ्लू आमतौर पर संक्रमित मुर्गी, पक्षी या उनके संपर्क से फैलता है। अगर कोई व्यक्ति बीमार पक्षी को छूता है, उसकी लार, सांस की बूंदों या बीट के संपर्क में आता है, तो संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा, अगर किसी सतह पर वायरस मौजूद हो और हाथ धोए बिना मुंह या आंख छू ली जाए, तब भी खतरा बढ़ जाता है।
बर्ड फ्लू के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
बर्ड फ्लू के लक्षण अक्सर आंखों से शुरू होते हैं। आंखों में लालिमा, जलन और खुजली महसूस होती है। इसके बाद हल्का बुखार, गले में खराश और बदन दर्द शुरू होता है। कई लोगों को शुरुआत में इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझने की गलती हो जाती है, जो खतरनाक साबित हो सकती है।
3 से 5 दिन में कैसे बिगड़ती है हालत?
अगर समय पर इलाज न मिले तो 3-5 दिनों में लक्षण गंभीर हो जाते हैं। तेज़ सिरदर्द, ज्यादा मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान हावी हो जाती है। कुछ मामलों में पेट दर्द और दस्त भी हो सकते हैं। सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड़न दिखे तो इसे बिल्कुल नज़रअंदाज़ न करें।
क्या इस समय चिकन और अंडा खाना सुरक्षित है?
अगर चिकन पूरी तरह पका हुआ है, तो उसे खाना सुरक्षित माना जाता है। बर्ड फ्लू का वायरस 70 डिग्री सेल्सियस पर खत्म हो जाता है, इसलिए चिकन को अच्छे से पकाएं। कच्चा या अधपका चिकन और अंडा खाने से बचें। चिकन या अंडा संभालने के बाद हाथों को साबुन से अच्छे से धोना बेहद ज़रूरी है।
जरूरी सलाह:
अगर संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने के बाद तेज बुखार (40°C से ज्यादा), सांस लेने में दिक्कत, भ्रम, गर्दन अकड़ना या दौरे पड़ें — तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज ही बचाव है।
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