प्रेमानंद जी महाराज आज के समय के ऐसे संत हैं जिनकी वाणी सीधे दिल को छू जाती है। सोशल मीडिया पर उनके प्रवचन रोज़ वायरल होते रहते हैं। वे खास तौर पर राधा रानी की भक्ति, प्रेम, सेवा और सरल जीवन का संदेश देते हैं। उनकी बातें न तो भारी-भरकम शास्त्रीय भाषा में होती हैं और न ही दिखावे से भरी, बल्कि आम आदमी की बोली में होती हैं, इसी कारण युवा वर्ग उनसे बहुत जुड़ाव महसूस करता है।
प्रेमानंद महाराज के माथे पर क्या लगा होता है?
अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि प्रेमानंद महाराज अपने माथे पर क्या लगाते हैं। खुद महाराज जी ने एक निजी बातचीत में बताया था कि वे श्रीजी का पीला चंदन माथे के ऊपरी भाग पर लगाते हैं। इसके अलावा आंखों के पास वे वृंदावन की पावन रज (धूल) लगाते हैं। यह कोई साधारण चंदन नहीं बल्कि भक्ति से भरा हुआ दिव्य प्रतीक है।
पीले चंदन का धार्मिक महत्व
पीला चंदन सनातन धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। यह जुगल किशोर (राधा-कृष्ण) की भक्ति का प्रतीक है। प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि वे यह चंदन 24 घंटे लगाए रखते हैं, क्योंकि यह उन्हें भगवान से जोड़े रखता है। चंदन सिर्फ सजावट नहीं बल्कि साधना का हिस्सा है, जो भक्त के भाव और समर्पण को दर्शाता है।
वृंदावन की रज का आध्यात्मिक महत्व
वृंदावन की मिट्टी या रज को बहुत पावन माना गया है। मान्यता है कि इस धूल में श्रीकृष्ण की लीलाओं की ऊर्जा समाई हुई है। प्रेमानंद महाराज इसे आंखों के पास लगाकर अपने जीवन को पूर्ण रूप से श्रीराधा-कृष्ण को समर्पित करने का भाव व्यक्त करते हैं। यह विनम्रता और भक्ति का प्रतीक है।
चंदन लगाने के फायदे और लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माथे पर चंदन लगाने से मन शांत रहता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। यह व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। चिंता, बेचैनी और तनाव कम होता है। साथ ही, चंदन ठंडक देता है और ध्यान व साधना में मदद करता है। यही कारण है कि संत और भक्त इसे रोज़ धारण करते हैं।
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