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नींद की कमी का दिमाग पर असर: क्यों जरूरी है रोज़ 7–8 घंटे की नींद

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग ठीक से सो नहीं पाते। देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का तनाव और ज्यादा सोचने की आदत नींद को खराब कर देती है। लेकिन अगर रोज़ 7 घंटे से कम नींद ली जाए तो इसका सीधा असर हमारे दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। धीरे-धीरे थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएँ बढ़ने लगती हैं। आइए आसान देसी हिंदी में समझते हैं कि नींद की कमी दिमाग को किस तरह प्रभावित करती है।

भावनाओं पर नियंत्रण कम हो जाता है

जब इंसान ठीक से नहीं सोता, तो दिमाग का भावनात्मक हिस्सा ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। रिसर्च के अनुसार नींद की कमी होने पर भावनात्मक प्रतिक्रिया लगभग 60% तक बढ़ सकती है। ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन और बेचैनी बढ़ने लगती है। कई बार व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भावुक भी हो जाता है और अपनी भावनाओं को संभालना मुश्किल हो जाता है।

तनाव और चिंता बढ़ने लगती है

कम नींद लेने से शरीर में कॉर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ जाता है, जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है। जब यह हार्मोन ज्यादा बनता है तो दिमाग हमेशा तनाव की स्थिति में रहता है। धीरे-धीरे चिंता, घबराहट, मूड स्विंग और मानसिक थकान बढ़ने लगती है। यही वजह है कि नींद की कमी वाले लोग अक्सर ज्यादा तनाव महसूस करते हैं।

निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है

दिमाग का एक अहम हिस्सा होता है प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, जो फैसले लेने, सही-गलत समझने और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। जब नींद पूरी नहीं होती तो यह हिस्सा ठीक से काम नहीं कर पाता। इसका असर यह होता है कि व्यक्ति को चीजें याद रखने में मुश्किल होती है, ध्यान भटकता है और कई बार गलत फैसले भी हो जाते हैं।

भावनात्मक यादों को दिमाग सही से प्रोसेस नहीं कर पाता

अच्छी नींद दिमाग को दिनभर के अनुभवों और भावनाओं को समझने और व्यवस्थित करने में मदद करती है। लेकिन अगर नींद पूरी नहीं हो तो दिमाग इन भावनाओं को सही तरह से संभाल नहीं पाता। इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति ज्यादा भावनात्मक दबाव महसूस करता है और छोटी बात भी बड़ी लगने लगती है।

अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आसान देसी उपाय

अगर आपको सोने में परेशानी हो रही है तो कुछ छोटी-छोटी आदतें बदलने से काफी फर्क पड़ सकता है। सोने से लगभग एक घंटा पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बना लें, क्योंकि इसकी नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को कम कर देती है। कमरे की लाइट हल्की रखें और सोने से पहले ज्यादा गंभीर बातें करने से बचें। शाम के समय चाय-कॉफी कम लें और सोने से पहले मन में चल रहे विचारों को डायरी में लिख लें। इससे दिमाग हल्का महसूस करता है और नींद जल्दी आ जाती है।

अच्छी सेहत और तेज दिमाग के लिए रोज़ 7 से 8 घंटे की नींद लेना बेहद जरूरी है। अगर लंबे समय से नींद की समस्या बनी हुई है, तो डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

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