भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश कर 150वीं वर्षगांठ पर Vande Mataram के उत्सव को मनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह गीत सिर्फ एक राष्ट्रभक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना और मातृभूमि के प्रति प्रेम का अमर संदेश है।
Vande Mataram का संदेश और प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने बताया कि Bankim Chandra Chatterjee ने 1875 में यह गीत लिखा, जिसने देशवासियों में स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति की भावना को जगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर पंक्ति में मातृभूमि की स्तुति और स्वतंत्र भारत के निर्माण का संदेश निहित है। भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह गीत केवल गुलामी के दौर तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरक है।
स्वतंत्रता संग्राम में Vande Mataram का योगदान
उन्होंने आगे बताया कि जब अंग्रेजों ने इस गीत को प्रतिबंधित किया, तब भी देशवासियों ने इसे अपने दिलों में जिंदा रखा। गीत ने लोगों में बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को जगाया। इसके कारण कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। इस गीत ने देशवासियों में “माँ भारत” के प्रति श्रद्धा और गौरव का भाव उत्पन्न किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक प्रयास
भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में फिर से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मातृभूमि के प्रति जागरूकता आई। “मेरा देश, मेरा मिट्टी”, “हर घर तिरंगा”, “सौंनात स्वाभिमान पर्व” जैसे अभियान लोगों में देशभक्ति और स्वदेशी चेतना को बढ़ावा दे रहे हैं।
Vande Mataram आज भी प्रासंगिक
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर पूरे देश में होने वाले कार्यक्रम हमें स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने और मातृभूमि के प्रति कर्तव्य निभाने का अवसर देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद एक कविता में कहा है कि Vande Mataram सिर्फ गीत नहीं, बल्कि देशभक्ति की ज्योति, गर्व और सम्मान का प्रतीक है।





