अस्थमा एक सांस से जुड़ी बीमारी है जिसमें समय रहते लक्षण पहचानना बहुत जरूरी होता है। अगर शुरुआत में ही संकेत समझ लिए जाएं तो बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है और बड़ा अटैक आने से बचा जा सकता है। नीचे हम आसान देसी हिंदी में अस्थमा के शुरुआती लक्षण, मुख्य संकेत और बचाव के तरीके बता रहे हैं।
अस्थमा के शुरुआती चेतावनी संकेत
अस्थमा शुरू होने से पहले शरीर कुछ संकेत देने लगता है। सबसे पहले सांस की नली में सूजन आने लगती है और ज्यादा बलगम बनने लगता है। नाक बहना या हर समय बंद-बंद सा महसूस होना आम संकेत है। गला और ठुड्डी में खुजली हो सकती है। कई बार व्यक्ति के कंधे उठे-उठे से लगते हैं और बॉडी पोस्चर झुका हुआ दिखता है क्योंकि उसे ठीक से सांस लेने में दिक्कत हो रही होती है। ये छोटे-छोटे लक्षण आगे चलकर बड़े अटैक का रूप ले सकते हैं।
अस्थमा के आम लक्षण (Asthma Symptoms)
अस्थमा में सबसे बड़ी दिक्कत सांस फूलना है। थोड़ा चलने या सीढ़ी चढ़ने पर ही दम फूल जाता है। लगातार खांसी आना, खासकर रात में, इसका बड़ा लक्षण है। छाती में जकड़न या दर्द महसूस हो सकता है। सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज (व्हीजिंग) भी सुनाई देती है। कई लोगों की नींद बार-बार खुल जाती है क्योंकि उन्हें रात में सांस लेने में परेशानी होती है।
अस्थमा अटैक क्या होता है?
जब अस्थमा अचानक ज्यादा बढ़ जाता है तो उसे अस्थमा अटैक या फ्लेयर-अप कहते हैं। इस दौरान सांस की नली और ज्यादा सूज जाती है, मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और बलगम रास्ता बंद कर देता है। मरीज को घबराहट, तेज सांस और सीने में भारीपन महसूस होता है। ऐसी हालत में तुरंत इलाज जरूरी होता है, वरना हालत बिगड़ सकती है।
अस्थमा का इलाज कैसे होता है?
अस्थमा के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। डॉक्टर आमतौर पर कंट्रोलर दवाएं और रिलीवर इनहेलर देते हैं। इनहेलर सांस की नली की सूजन कम करते हैं और तुरंत राहत देते हैं। कुछ गंभीर मामलों में इंजेक्शन या नेब्युलाइजर की जरूरत पड़ सकती है। सही समय पर दवा लेने से अस्थमा को काफी हद तक कंट्रोल में रखा जा सकता है।
अगर इनहेलर पास न हो तो क्या करें?
अगर अचानक सांस फूलने लगे और इनहेलर पास न हो तो घबराएं नहीं। सीधा बैठ जाएं, लेटने से बचें क्योंकि इससे सांस और अटक सकती है। धीरे-धीरे लंबी सांस लेने की कोशिश करें। धूल-मिट्टी, धुआं, ठंडी हवा, सर्दी-जुकाम वाले लोगों और ज्यादा तनाव से दूर रहें। प्रिजर्वेटिव वाले खाने-पीने की चीजें भी ट्रिगर बन सकती हैं। समझदारी और सावधानी से अस्थमा को काबू में रखा जा सकता है।
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