सनातन धर्म के अनुसार श्रावण मास में भगवान शंकर के विभिन्न रूपों की पूजा का महत्व है। परंतु खासतौर पर इस मास में शिवलिंग की पूजा अर्चना की जाती है। कहते हैं कि जो व्यक्ति इस तरह भगवान शंकर के लिंग रूप की पूजा अर्चना श्रद्धा पूर्वक सच्चे मन से करता है भगवान शंकर अपनी कृपा से उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं यही कारण है कि लोग पूरे महीने इनका जलाभिषेक करते हैं तथा विधिवत रूप से इनकी पूजा करते हैं।
इस कड़ी में हम आपको अपनी वेबसाइट के माध्यम से काफी जानकारी दे चुके हैं। अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि श्रावण मास में भगवान शंकर के किन ज्योतिर्लिंगों की आराधना करनी चाहिए।

हिंदू धर्म के शास्त्रों में भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंगों का वर्णन मिलता है जो देश के विभिन्न कोनों में स्थापित हैं। ज्योतिषी बताते हैं कि श्रावण मास में व्यक्ति को अपनी राशि और लग्न के अनुसार ज्योतिर्लिंग की पूजा अर्चना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं कि राशि और लग्न के अनुसार व्यक्ति को इस पावन के मांस में किस ज्योतिर्लिंग की आराधना करनी चाहिए।

मेष लग्न और राशि - ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

वृषभ लग्न और राशि - बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

मिथुन लग्न और राशि - त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

कर्क लग्न और राशि - भीमशंकर ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

सिंह लग्न और राशि - महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

कन्या लग्न और राशि - घृणेश्वर ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

तुला लग्न और राशि - रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

वृश्चिक लग्न और राशि - नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

धनु लग्न और राशि - सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

मकर लग्न और राशि - मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

कुंभ लग्न और राशि - केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।

मीन लग्न और राशि - विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की आराधना करें।