गाजियाबाद। शिक्षा विभाग ने यूपी बोर्ड के नौंवी से 12वीं  तक के स्‍कूल खोलने के लिए जिलेभर में एक सर्वे कराया, इसमें स्‍टूडेंट्स के पैरेंट्स से पूछा गया कि स्कूल खोलने पर क्‍या वे अपने बच्‍चों को भेजेंगे। करीब दो तिहाई पैरेंट्स ने बच्‍चों को स्‍कूल भेजने में सहमति जताई है। उन्‍होंने कहा कि कोरोना अब कंट्रोल में है, इसलिए बड़े बच्‍चों के स्‍कूल खोल देने चाहिए, जिससे बच्‍चों का भवष्यि खराब न हो।
  गाजियाबाद में माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक 66,261 स्‍टूडेंट्स रजिस्‍टर्ड हैं, इसमें कक्षा नौवीं में 21,483, दसवीं में 22068 और 12वीं में 22,710 स्‍टूडेंट्स शामिल हैं।  जिला विद्यालय निरीक्षक रवि दत्त के अनुसार गाजियाबाद के 226 स्कूलों के कक्षा नौवीं से 12वीं तक रजिस्‍टर्ड स्‍टूडेंट्स के 41,744 पैरेंट्स से संपर्क किया गया। इसमें से 27556 पैरेंट्स ने कहा कि वो अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं, बाकी पैरेंट्स ने कोरोना की वजह से बच्चों को स्कूल न भेजने की बात कही। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 66.01 फीसदी पैरेंट्स जुलाई से बच्‍चों को स्कूल भेजने को तैयार हैं। उनका कहना है कि पिछले वर्ष मार्च से स्‍टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्‍कूल बंद चल रहे हैं, बीच में कुछ समय के लिए ही स्कूल खुले, उसमें भी कक्षावार स्‍टूडेंट्स को बुलाया गया, ऐसी स्थिति में स्‍टूडेंट्स पढ़ाई नहीं कर पाए। पैरेंट्स की चिंता है कि अगर अभी भी स्कूल नहीं खुले तो अगले वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में स्‍टूडेंट्स का रिजल्ट अच्छा नहीं होगा। इससे उनका भविष्य प्रभावित होगा। इसलिए बड़े बच्‍चों के स्कूल खुलने चाहिए। पैरेंट्स का मानना है कि संसाधनों के अभाव में काफी संख्या में बच्चे ऑनलाइन क्‍लास नहीं ले पाए हैं। रूरल एरिया में इंटरनेट की समस्या हमेशा बनी रहती है। इसके अलावा काफी संख्या में ऐसे पैरेंट्स हैं, जिनके पास स्‍मार्ट फोन नहीं हैं, या जिनके पास मोबाइल हैं, उनके पैरेंट्स अनलॉक होने के बाद नौकरी पर जा रहे हैं।