ग्वालियर।  दीनदयाल नगर स्थित दंदरौआ धाम पर श्रीमद् भागवत कथा के छटवे दिन शनिवार को भगवताचार्य बृज किशोर शुक्ल ने रास लीला, कंस बध, रूकमणी विवाह की कथा का श्रवण कराया। आचार्य बृजकिशोर ने कहा कि व्यक्ति जब काम , क्रोध , लोभ , मोह के वशीभूत हो जाता है और जीवन में वह भटकाव महसूस करने लगता है और कोई सही रास्ता तय नहीं कर पाता है तो ऐसी स्थिति में उस प्राणी को शास्त्रों की शरण में आ जाना चाहिये। उन्होने कहा कि जिस प्रकार से गोपियां कृष्ण के निश्छल प्रेम मोह के जाल में फंस गई थी और मथुरा से आये अक्रूर जी जब कृष्ण को मथुरा ले जाने लगे तब सारा नंद गांव भी मथुरा की ओर जाने लगा। उसके बाद कृष्ण ने समझाया और वेदों की नीति की बात बताई तब कहीं जाकर गोपियां वापस लौटी।
आचार्य शुक्ल ने कहा कि जब जब धरती पर कंस जैसे पापियों का पाप बढा है तब तब भगवान ने अवतार लेकर उनका संहार किया है। वहीं रूकमणी विवाह की कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि स्त्री को सदैव अपनी मर्यादा में रहना चाहिये। पति के साथ-साथ सास श्वसुर की सेवा भी करना चाहिये।
भागवताचार्य बृजकिशोर शुक्ल ने कहा कि स्त्री को अपनी मर्यादा का पालन करना चाहिये। जिस घर की स्त्री मर्यादा धर्म का पालन करती है वह घर स्वर्ग के समान होता है। उस घर में सुख समृद्धि दिनों दिन बढ़ती भी है। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता नरेन्द्र पाल सिंह भदौरिया , विनोद तिवारी , दीपक दिलेर, संजय पाराशर, धर्मेन्द्र शर्मा, श्रीमती मनोरमा, आशा शर्मा, राजपाल सिंह चौहान, विजय माथुर, विपिन शर्मा, रामगोपाल दीक्षित , हाकिम सिंह नरवरिया, आदि मौजूद रहे। आज कथा के सातवे दिन आज सुदामा चरित्र , कृष्ण उधव संवाद, श्रीमद भागवत पूजन होगा।