प्रत्येक वर्ष में श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मौना पंचमी और नाग मरुस्थले का पर्व मनाया जाता है। जो इस वर्ष 28 जुलाई को यानि जो आने वाले बुधवार को पड़ रहा है। बता दें मौना पंचमी का व्रत खास तौर पर बिहार में नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व पर रखे जाने वाला व्रत बिल्कुल मौन रखकर किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार मौन व्रत करने से व्यक्ति की मानसिक दृृढ़ता का विकास होता है और शारीरिक ऊर्जा का संचालन होता है। आगे जानें इससे जुड़ी अन्या बातें-

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ नागदेव की पूजा करने का विधान है। बताया जाता है कि प्रत्येक वर्ष झारखंड के देवघर के शिव मंदिर में इस दिन शर्वनी मेला लगता है। तो वहीं अन्य आम मंदिरों में इस दिन शिव शंकर तथा शेषनाग की अर्चना की जाती है। जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा आदि करता है उसके जीवन में से काल का भय खत्म हो जाता है, साथ ही साथ जीवन में से तमाम संकट दूर होते हैं।

जिन लोगों की नई नई शादी हुई होती है उनके लिए यह दिन अधिक विशेष माना जाता है। खासतौर पर नवविवाहताएं 15 जिन व्रत करती हैं तथा प्रत्येक दिन नाग देव की पूजा करती हैं। मान्यता है कि जो महिलाएं श्रद्धापूर्वक पूजा करती हैं तथा व्रत से संबंधित का श्ववण करती हैं उनके जीवन की सभी प्रकार की समस्याएं व परेशानियां दूर हो जाती हैं।

इसके अतिरिक्त कई क्षेत्रों में इस दिन आम के बीज, नींबू तथा अनार के साथ नीम के पत्ते चबाते हैं। ऐसा कहा जाता है ये पत्ते शरीर से जहर हटाने में मददगार होते हैं। तो वही इस दिन देवों के महादेव की दक्षिणामूर्ति स्वरूप की पूजा का भी विधान है। कहा जाता है इस दिन पंचामृत और जल से शिवाभिषेक करने से व्यक्ति की बुद्धि तथा ज्ञान में बढ़ोतरी होती है।