बोकारो। कोरोना संक्रमणकाल में बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हुई है। पिछले डेढ़ साल से स्कूल बंद रहने के कारण ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गयी है, लेकिन सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का अभाव और  स्मार्ट फोन नहीं रहने से बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में  बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड की पपलो पंचायत के एक शिक्षक भीम महतो के लगन की तारीफ हर ओर हो रही है। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित शिक्षक भीम महतो ने लॉकडाउन  में ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए गांव में जगह-जगह दीवारों पर हिंदी-इंग्लिश की वर्णमाला लगा दी। साथ ही गांव के मंदिर में लगे लाउड स्पीकर को जरिया बनाया और बच्चों की पढ़ाई शुरू करवाई। शिक्षक लाउड स्पीकर से बोलते हैं तो दूर तक बैठे बच्चे उनके साथ ही इसे दोहराते हैं।  
स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई रुक गई थी। कई स्कूल छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं, लेकिन गरीब बच्चों के पास स्मार्ट फोन न होने से उन्हें परेशानी हो रही थी। देश में लॉकडाउन लगने के बाद से ही राजकीय मध्य विद्यालय, जुनौरी के शिक्षक भीम महतो लगातार क्षेत्र में बच्चों को फ्री में पढ़ा रहे हैं। वे अपने खर्च पर बच्चों को कॉपी, पेन, मास्क, सैनिटाइजर और बिस्कुट भी देते हैं। उन्होंने घटियारी पंचायत के मंगलडाडी गांव में बसे बच्चों को सबसे पहले पढ़ाने की शुरुआत की थी।
शिक्षक भीम महतो का कहना है कि कोरोना काल में बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। इसे देखते हुए उन्होंने गरीब बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। लॉकडाउन के वक्त स्मार्टफोन से ऑनलाइन पढ़ाई की बात कही गई। गांव में ऐसे कई बच्चे हैं, जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है। ऐसे में मैंने सोचा कि इन्हें पढ़ाने के लिए मंदिर के लाउड स्पीकर की मदद ली जाए।  
झारखंड की उप राजधानी दुमका  के जड़मुंडी के गांव में भी सरकारी स्कूल  के शिक्षक की पहल पर ने बच्चों को लिए घरों की दीवाल पर ब्लैकबोर्ड  बनवा दिए, ताकि स्कूल बंद रहने के बाद भी उनकी पढ़ाई बाधित न हो। उस दौरान देश में हर ओर जड़मुंडी के गांव की चर्चा हुई और सबने शिक्षक की तारीफ की।