सारणी (सांध्य दैनिक खबरवाणी) सारणी और पाथाखेड़ा नगरों के अलावा क्षेत्र के 22 गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा तक मुहैया नहीं है। कहने के लिए तो सारणी के पाटाखेड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन यहां डॉक्टर के ही नहीं रहने से यह भी किसी काम का साबित नहीं हो रहा है। नतीजतन क्षेत्र के लोग इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे रहते हैं। यही वजह भी है कि क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गई है। 

सारणी नगर की पहचान जहां विद्युत नगरी के रूप में है वहीं पाथाखेड़ा कोयलांचल के रूप में प्रसिद्ध है। इन दोनों औद्योगिक संस्थानों के कारण ही न केवल जिले और प्रदेश बल्कि देश भर से लोग यहां आकर बसे हैं। इन दोनों संस्थानों में कार्यरत लोगों और उनके परिजनों के लिए तो विभागीय अस्पताल हैं, लेकिन उनके अलावा क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोगों और आसपास के 22 गांवों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने शासन ने पाटाखेड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य खोला है। यह बात यह है कि यह अस्पताल नाम का ही साबित हो रहा है। लम्बे समय से इस अस्पताल में डॉक्टर ही पदस्थ नहीं है। इससे लोगों को इलाज ही नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टर के नहीं होने के कारण लोगों को मजबूरन निजी चिकित्सकों से महंगा इलाज कराना पड़ रहा है, लेकिन अधिकांश लोग गरीबी के चलते निजी डॉक्टरों से इलाज नहीं करवा पाते हैं। इससे क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ आ गई है। लोग भी मजबूरी में उनसे ही इलाज कराते हैं क्योंकि अपेक्षाकृत सस्ते में उनका इलाज हो जाता है। यह बात अलग है कि इसमें कई बार उनकी जान भी खतरे में पड़ जाती है। इसके बावजूद झोलाछाप डॉक्टरों से ही इलाज कराना लोगों की मजबूरी बनी है। 

पाटाखेड़ा को नहीं मिला एक भी चिकित्सक

कहने को सांसद दुर्गादास उइके और क्षेत्रीय विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे के प्रयासों से जिले में 12 नए डॉक्टरों की पदस्थपना हुई है, लेकिन इसके बावजूद पाटाखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को एक डॉक्टर भी नहीं मिल सका है। लंबे समय से डॉक्टर के नहीं होने के कारण लोग भी कोई परेशानी होने पर यहां आना उचित नहीं समझते हैं। 

पाटाखेड़ा के डॉक्टर भैंसदेही में दे रहे सेवा 

बताया जाता है कि शासन ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटाखेड़ा में डॉ. साहू को पदस्थ किया था, लेकिन पिछले करीब डेढ़ वर्षों से उनसे भैंसदेही में कार्य लिया जा रहा है। वर्तमान में वे भैंसदेही बीएमओ के रूप में पदस्थ हैं, लेकिन उनका वेतन घोड़ाडोंगरी से ही निकल रहा है। उनके स्थान पर शाहपुर में पदस्थ डॉ. विजय सिंह की कुछ दिनों तक पाटाखेड़ा में पदस्थ किया गया, लेकिन करीब 3 महीने पहले उन्हें भी वापस शाहपुर भिजवा दिया गया है। इससे यह स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टर विहीन हो चुका है। वैसे क्षेत्रवासियों का कहना है कि यहां जब रिकॉर्ड में डॉक्टर पदस्थ दिखाए जाते थे, तब भी वे यहां कम और घोड़ाडोंगरी में ज्यादा सेवाएं देते थे। इसलिए उस समय भी उनकी सेवाएं नहीं मिल पाती थी और अब तो महीनों से यहां कोई डॉक्टर ही पदस्थ नहीं है। क्षेत्रवासियों ने पाटाखेड़ा में जल्द डॉक्टर पदस्थ किए जाने की मांग की है। 


वे बोले...

पूर्व में पाटाखेड़ा में डॉ. साहू पदस्थ थे, लेकिन उनकी सेवाएं फिलहाल भैंसदेही बीएमओ के रूप में ली जा रही हैं। वैकल्पिक तौर पर हमने शाहपुर में पदस्थ डॉ. विजय सिंह को बुलवाया था, लेकिन उन्हें भी वापस भिजवा दिया गया है। अब और कोई व्यवस्था करने के प्रयास किए जा रहे हैं। 

डॉ. संजीव शर्मा, बीएमओ, घोड़ाडोंगरी