बैतूल।(सांध्य दैनिक खबरवाणी) जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस, एसडीएम एमपी बरार और मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके तिवारी को ज्ञापन सौंपे। उन्होंने अपनी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर जल्द से जल्द इन्हें पूरा किए जाने की मांग की है। 

सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अंकिता वरवड़े के नेतृत्व में रीता डढोरे, रूचिका चौकीकर सहित अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि एनएचएम भोपाल के मिशन संचालक के आदेश अनुसार मार्च से सितंबर तक पूर्ण पीबीआई दिया जाना था। यह कुछ जगह प्राप्त हुआ है, लेकिन कुछ ब्लॉकों में अप्राप्त है। सभी जिला स्तर और ब्लॉक स्तर के सीएचओ की ड्यूटी कोविड वैक्सीनेशन में उप स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लगाई जा रही है। कोरोना पेंडेमिक में सभी सीएचओ ने अपना पूर्ण योगदान कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य किया। पिछले 9 माह से हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं तथा ऑनलाइन पोर्टल पर काम नहीं होने की स्थिति में भोपाल एनएचएम के पास से सीएचओ के पास काल भी आ रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आदेश अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की ड्यूटी कोविड-19 महा अभियान के दौरान ही लगाई जाएं, अतिरिक्त नहीं ताकि ग्रामीण स्तर पर जनता को संपूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सके। केवल संस्था पर कार्य करने हेतु ही निर्देशित किया जाएं जिससे समस्त राष्ट्रीय कार्यक्रम सुचारू रूप से संचालित हो सकेंगे।

यदि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की ड्यूटी कोविड-19 में लगाई जाती है तो 500 रुपये प्रतिदिन के अलग से भुगतान किया जाएं। प्रतिदिन कोविड-19 ड्यूटी होने के कारण हम भारत सरकार द्वारा दिए गए 15 प्रकार के कार्य आधारित टूल को पूरा करने में सक्षम नहीं है। इसके कारण प्रतिमाह 15 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आदेश अनुसार टेलीफोन डाटा इंटरनेट का 500 रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाएं। टीकाकरण दल हेतु भोजन व जलपान की व्यवस्था कराई जाएं। टीकाकरण अभियान हेतु वित्तीय वर्ष 2021-22 के निर्देशानुसार 500 रुपये प्रति सत्र और 100 रुपये अतिरिक्त दिए जाने के निर्देश हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की अनुपस्थिति में केवल अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को ही दायित्व सौंपा जाएं। इसी तरह एएनएम, एमपीडब्ल्यू, आशा के अनुपस्थित होने पर उनके कार्य दायित्व उन्हीं कर्मचारियों को सौंपे जाएं। शासकीय अवकाश के दिन कहीं पर भी ड्यूटी नहीं लगाई जाएं। यदि देर रात्रि तक किसी भी महिला अधिकारी-कर्मचारी से कार्य करवाया जाता है तो उसकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाएं अन्यथा रात्रिकालीन ड्यूटी न लगाई जाएं क्योंकि ग्रामीण माहौल में बहुत से लोग मदिरापान इत्यादि करते हैं। इससे कुछ घटनाएं हमारे साथ बीत भी चुकी है। अन्य जिलों की तरह हमारा भी समय सुबह 9 से शाम के 5 बजे तक किया जाएं।