मकर संक्रांति के त्योहार पर गंगा स्नान दान-पुण्य जप और पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है,मकर संक्रांति पर सूर्य धनु राशि को छोड़ते हुए अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश कर जाते है। इस दिन से सूर्यदेव की यात्रा दक्षिणायन से उत्तरायण दिशा की ओर होने लगती हो

मकर संक्रांति पर योग का रहस्य

मकर संक्रांति के अवसर पर हम योग साधक के सूर्य नमस्कार का अभ्यास करके सूर्य भगवान की पूजा करके भारत के लोगों के प्रति अपना  आभार व्यक्त कर सकते हैं इस दिन सुबह सुबह कोई भी योग अभ्यास अधिक फलदायी होता है 

मकर संक्रांति योग और साधना में तेजी लाने का सही समय

मकर का अर्थ है। मकर राशि या मकर राशि की राशि में जाने को मकर संक्रांति कहा जाता है जिसे उत्तरायण भी कहा जाता है जब सर्दियों के महीनों अंत और लंबे दिनों की शुरुआत का प्रतीक हो

यह एक भारतीय त्योहार है जो सूर्य भगवान के सम्मान में उनकी ऊर्जा की कृपा के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मनाया जाता है, कहा जाता है  कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य की किरणें शरीर और त्वचा के लिए बहुत ही सेहतमंद होती है। इसदिन लोग सूर्य देव के प्रति अपना आभार व्यक्त करते है ।

उत्तरायण : समाधि पद

अब हम उत्तरायण की दहलीज पर हैं।  उत्तरी भाग या उत्तरायण को समाधि पद या केवल्य पद के रूप जाना जाता है यह ज्ञान और समय ही संतुतिल योगियों के लिए स्थिर आध्यात्मि प्राप्ति की दिशा में प्रयास करने के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण हो यह एकाग्रता, ध्यान और गहन अवशोषण के माध्यम से शरीर मन  और आत्मा के एकीकरण की कला पर काम करने का समय है योग मे शरीर, मन और आत्मा एकीकरण करने की तकनीक ।

सोडहं ध्यान

एके हिन्दू मंत्र है जिसका संस्कृत में अर्थ है "वैवह / वह / वह हूँ।
वैदिक दर्शन में इसका अर्थ है स्वयं को ब्रह्मांड या परम वास्तविकता के साथ पहचानना

जब  ध्यान के लिए उपयोग किया जाता है तो "सोडम" किसी के श्वास पैटर्न को नियंत्रित करने गहरी सांस लेने और एकाग्रता प्राप्त करने में मदद करने के लिए एक प्राकृतिक मंत्र के रूप में कार्य करता है

सो... साँस लेने की आवाज है और उस सांस के साथ  मन मे याद किया जाता है  हम्म...साँस छोड़ने की आवाज है, और साँस छोड़ने साथ हम्म को मन में याद किया जाता है

आदित्यस्य नमस्कारम- ये वीत दिने दिन। आयु प्रज्ञा बलं वीर्य तेजस्तेपाय जायते
 जो लोग  प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं। उनकी , आयु ,प्रज्ञा, वीर्य ,बल और तेज़ बढ़ता है।

सूर्य नमस्कार में बारह आसन होते हैं

(1)प्रणाम आसान

सूरज की तरफ चेहरा करें और सीधे खड़े हों और दोनों  पैरों को मिलाएं कमर सीधी रखें अव हाथों को सीने के पास लाए और दोनों हथेलियों को मिलाकर प्रणाम की अवस्था बनाए।

(2)हस्तउत्तनासन

पहली अवस्था में ही खड़े होकर अपने हाथों को सिर के ऊपर उठाकर सीधा रखे। अब हाथों को प्रणाम की अवस्था में ही पीछे की ओर ले जाएं और कमर को पीछे की तरफ झुकाएं।

(3)पादहस्तासन 

अब धीरे-धीरे सांस छोड़े और आगे की और झुकते हुए हाथों से पैरों की उंगलियों को छुएं इस समय आपका सिर घुटने से मिला होना  चाहिए। 

(4)अखसंचालनासन

धीरे-धीरे सांस लें और सीधा पैर पीछे की ओर फैलाएं ,सीधे पैर का घटना जमीन से मिलना चाहिए अबू दूसरे पैर को घुटने से मोड़े और हथेलियों को जमीन पर सीधा रखें। सिर को आसमान की ओर रखें।

(5)दंडासन

अब सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों और पैरो को सीधी लाइन में रखे और पुस-अप की पोजीशन में आ जाए।

(6)अष्टांग नमस्कार 

अब सांस लेते हुए अपनी हथेलियों ,सीने घुटनों ,और पैरों को जमीन से मिलाएं। इस अवस्था में रहे और सांस को रोके।

(7) भुजंगासन

अब हथेलियों को जमीन पर रखकर पेट को जमीन से मिलाते हुए सिर को पीछे आसमान की तरफ जितना हो सके झुकाएं।


(8) अधोमुख शवासन 

इसे पर्वतासन भी कहा जाता है इसके अभ्यास के लिए अपने पैरों को जमीन पर सीधा रखे और कूल्हे को ऊपर की ओर उठाएं । सांस छोड़ते हुए कंधो को सीधा रखें और सर को अंदर की तरफ रखे।

(9)अश्व संचालनासन

धीरे धीरे  सांस ले और सीधा पैर पीछे की ओर फैलाए । सीधे पैर का घुटना जमीन से मिलना चाहिए। अब दूसरे पैर को घुटने से मोड़े और हथेलियों को जमीन पर सीधा रखें। सिर को आसमान की ओर रखे।

(10)पादहस्तासन

अब धीरे- सांस छोड़े और आगे की ओर झुकते हुए हाथों से पैरों की उंगलियो को छुएं आपका सिर घुटनो से मिला होना चाहिए।

(11) हस्तउत्तनासन

पहली अवस्था में ही खडे होकर अपने हाथों हाथों को सिर ने ऊपर उठाकर सीधा रखें अब हाथों को प्रणाम की अवस्था मे ही पीछे की ओर ले जाएं और कमर को पीछे की तरफ झुकाएं। इस दौरान का आप आधे चांद आभार बनाएंगे। इस आसन को अर्धचंद्रासन भी कहा जाता है।

(12) प्रणामासन 

सूरज की तरफ चेहरा सीधा करके खड़े हों और दोनों को पैरों को मिलाए कमर सीधी रखें अब दोनों हाथों को सीने के पास लाए और दोनों हथेलियों को मिलाकर प्रमाण की अवस्था बनाए।

योग प्रशिक्षक निधि सेन
(योगा)